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वे जन्म दे रही हैं हर क्षण एक नयी पृथ्वी : मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है पर अरुण होता की समीक्षा





 मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है पर वरिष्ठ आलोचक अरुण होता का यह सुचिन्तित आलेख पाखी के दिसंबर -20 अंक में प्रकाशित हुआ है। 

आज से लगभग चार साल पहले रश्मि भारद्वाज का पहला कविता संग्रह ‘एक अतिरिक्त ‘अ’ ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार से पुरस्कृत हुआ था। रश्मि का सद्यतम प्रकाशित दूसरा कविता संग्रह है ‘मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है’। इस संग्रह की कविताओं से गुजर कर सबसे पहले जो बिंदु हमारे सामने उभर कर आता है वह है कवयित्री का सोचने का नज़रिया।इस दृष्टिकोण के चलते कवयित्री अपने समकालीनों से भिन्न है।

कविता की संभावना और आलोचना के संकट- प्रियदर्शन



नया पथ- जुलाई/सितंबर अंक में चार युवा कवियों के संग्रह पर सुपरिचित कथाकार-आलोचक प्रियदर्शन की टिप्पणी

अशोक वाजपेयी की कविताएँ, विपुला च पृथ्‍वी.......(साभार ओम निश्चल की फेसबुक वॉल से)

  संसार में कितनी तरह की कविताएं लिखी जाती हैं। देश काल परिस् थिति को छूती और कभी कभार उसके पार जाती हुई। कभी दुख कभी सुख कभी आह्लाद कभी विष...