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घर बदर : मध्यवर्गीय जीवन की यातना और बदलते समय में ध्वस्त हुए सपनों का कथालोक - ज्योतिष जोशी
वरिष्ठ कथाकार श्री संतोष दीक्षित का पिछले वर्ष प्रकाशित उपन्यास ' घर बदर ' राम अवतार दुबे तदन्तर दुर्गाशंकर दुबे तथा उनके पौत्र कुंदन दुबे की कथा है जो कमल, किशोर और कौशल नामक उनके तीन पुत्रों तक आती है। घर से विस्थापित तीन पीढ़ियों की कथा में स्थाई घर बनवाने का सपना केंद्र में है। पर इस सपने की जद में एक पूरी सदी को लांघती बढ़ती कथा समाज के बदलते ढंग और ढांचे के साथ हिंदी पट्टी की अधोगति की कहानी भी कहती चलती है।
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अशोक वाजपेयी की कविताएँ, विपुला च पृथ्वी.......(साभार ओम निश्चल की फेसबुक वॉल से)
संसार में कितनी तरह की कविताएं लिखी जाती हैं। देश काल परिस् थिति को छूती और कभी कभार उसके पार जाती हुई। कभी दुख कभी सुख कभी आह्लाद कभी विष...

