Showing posts with label setusahitya. Show all posts
Showing posts with label setusahitya. Show all posts
घर बदर : मध्यवर्गीय जीवन की यातना और बदलते समय में ध्वस्त हुए सपनों का कथालोक - ज्योतिष जोशी
वरिष्ठ कथाकार श्री संतोष दीक्षित का पिछले वर्ष प्रकाशित उपन्यास ' घर बदर ' राम अवतार दुबे तदन्तर दुर्गाशंकर दुबे तथा उनके पौत्र कुंदन दुबे की कथा है जो कमल, किशोर और कौशल नामक उनके तीन पुत्रों तक आती है। घर से विस्थापित तीन पीढ़ियों की कथा में स्थाई घर बनवाने का सपना केंद्र में है। पर इस सपने की जद में एक पूरी सदी को लांघती बढ़ती कथा समाज के बदलते ढंग और ढांचे के साथ हिंदी पट्टी की अधोगति की कहानी भी कहती चलती है।
वे जन्म दे रही हैं हर क्षण एक नयी पृथ्वी : मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है पर अरुण होता की समीक्षा
मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है पर वरिष्ठ आलोचक अरुण होता का यह सुचिन्तित आलेख पाखी के दिसंबर -20 अंक में प्रकाशित हुआ है।
आज से लगभग चार साल पहले रश्मि भारद्वाज का पहला कविता संग्रह ‘एक अतिरिक्त ‘अ’ ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार से पुरस्कृत हुआ था। रश्मि का सद्यतम प्रकाशित दूसरा कविता संग्रह है ‘मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है’। इस संग्रह की कविताओं से गुजर कर सबसे पहले जो बिंदु हमारे सामने उभर कर आता है वह है कवयित्री का सोचने का नज़रिया।इस दृष्टिकोण के चलते कवयित्री अपने समकालीनों से भिन्न है।
कविता पेंटिंग पेड़ कुछ नहीं - सामाजिक सरोकार-संवेदना से जुड़ी कहानियाँ
हंस' के दिसंबर-2020 अंक में कथाकार कैलाश बनवासी के कहानी संग्रह-' कविता पेंटिंग पेड़ कुछ नहीं' पर लेखक-आलोचक गोविंद सेन की समीक्षा
Subscribe to:
Posts (Atom)
अशोक वाजपेयी की कविताएँ, विपुला च पृथ्वी.......(साभार ओम निश्चल की फेसबुक वॉल से)
संसार में कितनी तरह की कविताएं लिखी जाती हैं। देश काल परिस् थिति को छूती और कभी कभार उसके पार जाती हुई। कभी दुख कभी सुख कभी आह्लाद कभी विष...




