घर बदर: इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में एक निम्न- मध्यवर्गीय व्यक्ति के संघर्ष से जुड़ा उपन्यास



दस पद्रह दिन पहले एक पुस्तक की खोज के सिलसिले में अशोक राजपथ गया था. पटना युनिवर्सिटी लाइब्रेरी के ठीक सामने सुमनजी की दुकान प्रगतिशील साहित्य सदन पर पहुंचा. कुछ किताबें देख रहा था. इसी बीच पटना शहर के मशहुर साहित्यकार संतोष दीक्षित आ गए. दोनों की एक दूसरे पर नजर पड़ी.

अशोक वाजपेयी की कविताएँ, विपुला च पृथ्‍वी.......(साभार ओम निश्चल की फेसबुक वॉल से)

  संसार में कितनी तरह की कविताएं लिखी जाती हैं। देश काल परिस् थिति को छूती और कभी कभार उसके पार जाती हुई। कभी दुख कभी सुख कभी आह्लाद कभी विष...