दस पद्रह दिन पहले एक पुस्तक की खोज के सिलसिले में अशोक राजपथ गया था. पटना युनिवर्सिटी लाइब्रेरी के ठीक सामने सुमनजी की दुकान प्रगतिशील साहित्य सदन पर पहुंचा. कुछ किताबें देख रहा था. इसी बीच पटना शहर के मशहुर साहित्यकार संतोष दीक्षित आ गए. दोनों की एक दूसरे पर नजर पड़ी.