कुमार मंगलम युवा कवि-आलोचक हैं। वरिष्ठ कवि ज्ञानेन्द्रपति के दो संग्रहों- गंगा-तट और गंगा-बीती को आधार बनाकर उन्होंने कवि, बनारस और गंगा के रचनात्मक संबंध को बेहद संजीदा और शोधपरक दृष्टि एवं सधी हुई भाषा में परखा है।
कुमार मंगलम युवा कवि-आलोचक हैं। वरिष्ठ कवि ज्ञानेन्द्रपति के दो संग्रहों- गंगा-तट और गंगा-बीती को आधार बनाकर उन्होंने कवि, बनारस और गंगा के रचनात्मक संबंध को बेहद संजीदा और शोधपरक दृष्टि एवं सधी हुई भाषा में परखा है।
युवा कवि निशांत के कविता संग्रह 'जीवन हो तुम' पर प्रखर युवा आलोचक नीरज कुमार मिश्र की यह समीक्षा प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका आजकल (जनवरी 2021) में प्रकाशित हुई है।
संसार में कितनी तरह की कविताएं लिखी जाती हैं। देश काल परिस् थिति को छूती और कभी कभार उसके पार जाती हुई। कभी दुख कभी सुख कभी आह्लाद कभी विष...